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तेज प्रताप यादव की उम्मीदवार वीणा मानवी का नामांकन रद्द

पटना: बिहार की सियासत से इस वक्त की बड़ी खबर राजधानी पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से आ रही है। बांकीपुर उपचुनाव के मद्देनजर मंगलवार को एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जहां तेज प्रताप यादव समर्थित पार्टी (जनशक्ति जनता दल/जनतांत्रिक जनता दल) की प्रत्याशी और चर्चित समाज सेविका वीणा मानवी का नामांकन रद्द कर दिया गया है। निर्वाचन अधिकारियों द्वारा की गई स्क्रूटनी (जांच) के दौरान नामांकन पत्र में एक गंभीर तकनीकी खामी पाई गई, जिसके बाद उनकी उम्मीदवारी को खारिज कर दिया गया। इस फैसले के बाद बांकीपुर का चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गया है।

एक प्रस्तावक की कमी बनी नामांकन रद्द होने की वजह

निर्वाचन अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, वीणा मानवी के नामांकन पत्र में चुनावी नियमों और प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन नहीं किया गया था। चुनाव आयोग के कड़े नियमों के मुताबिक, किसी भी गैर-मान्यता प्राप्त दल या निर्दलीय प्रत्याशी के नामांकन पत्र पर 10 प्रस्तावकों के हस्ताक्षर होना अनिवार्य है। लेकिन जांच के दौरान वीणा मानवी के पर्चे पर केवल 9 प्रस्तावकों के ही हस्ताक्षर पाए गए। महज एक हस्ताक्षर की इस तकनीकी चूक ने वीणा मानवी की चुनावी उम्मीदवारी पर विराम लगा दिया।

गौरतलब है कि सोमवार (13 जुलाई) को नामांकन दाखिल करने का आखिरी दिन था और मंगलवार को स्क्रूटनी की गई। बांकीपुर सीट से वीणा मानवी और निर्दलीय प्रत्याशी प्रिय किन्नर समेत कुल 10 उम्मीदवारों के पर्चे खारिज किए गए हैं। इस हाई-प्रोफाइल सीट पर आगामी 30 जुलाई को मतदान होना तय है।

गिरफ्तारी से लेकर पर्चा रद्द होने तक का ‘हाई वोल्टेज ड्रामा’

वीणा मानवी का नामांकन पहले दिन से ही विवादों और चर्चाओं में रहा है। सोमवार को जब वे पटना समाहरणालय में अपना नामांकन दाखिल कर बाहर निकलीं, तो वहां पहले से ही गांधीनगर थाने की पुलिस मुस्तैद थी। पुलिस के पास कोर्ट द्वारा जारी एक पुराना गैर-जमानती वारंट (रेड वारंट) था।

जैसे ही पुलिस ने वीणा मानवी को हिरासत में लेने की कोशिश की, उनके समर्थक पुलिसकर्मियों से उलझ गए। समाहरणालय के बाहर काफी देर तक तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बनी रही। आखिरकार, हाई वोल्टेज ड्रामे के बीच पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

क्या था मामला?

पटना पुलिस के मुताबिक, वीणा मानवी के खिलाफ वर्ष 2009 से धोखाधड़ी (धारा 420) का एक पुराना मामला लंबित था, जिसमें कोर्ट से गैर-जमानती वारंट जारी हुआ था। हालांकि, गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जमानत मिल गई और वह रिहा हो गईं। लेकिन रिहाई के अगले ही दिन नामांकन रद्द होने से उन्हें दूसरा बड़ा झटका लगा।

‘यह सरकार की साजिश, हम कोर्ट जाएंगे’: तेज प्रताप यादव

अपनी उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने की खबर के बाद पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव खुद पटना समाहरणालय पहुंचे। घंटों समाहरणालय के भीतर रहने के बाद जब वे बाहर निकले, तो मीडिया के सवालों से बचते नजर आए। हालांकि, बाद में सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए तेज प्रताप यादव ने कहा,

“यह हमारे कैंडिडेट के खिलाफ एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश है। सरकार के इशारे पर यह षडयंत्र रचा जा रहा है। हम इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे और न्याय के लिए माननीय अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।”

इससे पहले, गिरफ्तारी के वक्त भी वीणा मानवी और तेज प्रताप ने इसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चाल बताया था ताकि उन्हें चुनाव लड़ने से रोका जा सके।

उपचुनाव पर क्या होगा असर?

बांकीपुर उपचुनाव में वीणा मानवी का मैदान से बाहर होना तेज प्रताप यादव के राजनीतिक फ्रंट के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। एक छोटी सी तकनीकी लापरवाही (प्रस्तावकों की संख्या) के कारण पार्टी मुख्य मुकाबले से बाहर हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम के बाद अब बांकीपुर में मुख्य मुकाबला अन्य प्रमुख दलों के बीच सिमट जाएगा, लेकिन ‘साजिश बनाम नियम’ की इस लड़ाई पर पूरे बिहार के राजनीतिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं।

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